अमेरिका का 1% रेमिटेंस टैक्स: भारत नक़द भेजने पर टैक्स, बैंक खाते और कार्ड से भेजे पैसे पर नहीं
धारा 4475 के तहत 1 जनवरी 2026 से अमेरिका से कुछ रेमिटेंस पर टैक्स लग रहा है। IRS के अप्रैल 2026 के प्रस्तावित नियम बताते हैं कि भारत भेजे जाने वाले किन ट्रांसफ़र पर 1% लगेगा और इसे कौन वसूलेगा।

मुख्य बातें
रेमिटेंस- 1 जनवरी 2026 से उन रेमिटेंस पर 1% अमेरिकी फ़ेडरल एक्साइज़ टैक्स लगता है, जिनका भुगतान भेजने वाला नक़द, मनी ऑर्डर, कैशियर्स चेक या इसी तरह के भौतिक साधन से करता है।
- बैंक खाते से या डेबिट/क्रेडिट कार्ड से किए गए ट्रांसफ़र इस टैक्स से बाहर हैं; प्रस्तावित नियम ACH ट्रांसफ़र, पर्सनल चेक और 15 डॉलर या उससे कम के ट्रांसफ़र को भी बाहर रखते हैं।
- टैक्स की देनदारी भेजने वाले की है और वसूली ट्रांसफ़र कंपनी करती है; प्रस्तावित नियम 13 अप्रैल 2026 को प्रकाशित हुए और अंतिम नियम आने तक इन पर भरोसा किया जा सकता है।
अमेरिका में रह रहे जो भारतीय घर नक़द पैसा भेजते हैं, वे 2026 की शुरुआत से 1% अतिरिक्त चुका रहे हैं। अब अमेरिकी ट्रेज़री और इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (IRS) के प्रस्तावित नियमों ने साफ़ कर दिया है कि कौन-से ट्रांसफ़र इसके दायरे में हैं और कौन-से नहीं। बैंक खाते से भेजे जाने वाले ज़्यादातर ट्रांसफ़र इस टैक्स से बाहर हैं।
क्या बदला
वन बिग ब्यूटीफ़ुल बिल एक्ट नाम से जाने जाने वाले 2025 के क़ानून ने इंटरनल रेवेन्यू कोड में धारा 4475 जोड़ी। इसके तहत 31 दिसंबर 2025 के बाद के कुछ रेमिटेंस ट्रांसफ़र पर 1% एक्साइज़ टैक्स लगता है। IRS ने 10 अप्रैल 2026 की अपनी विज्ञप्ति IR-2026-48 में कहा कि यह टैक्स तब लगता है जब भेजने वाला नक़द, मनी ऑर्डर, कैशियर्स चेक या इसी तरह के भौतिक साधन से भुगतान करता है।
प्रस्तावित नियम (REG-114499-25) 13 अप्रैल 2026 को फ़ेडरल रजिस्टर में छपे। इन पर टिप्पणियां 12 जून 2026 तक ली गईं। मुख्य बातें:
- टैक्स लगेगा: नक़द, मनी ऑर्डर, कैशियर्स चेक और प्रस्ताव के मुताबिक़ ट्रैवलर्स चेक से किए गए ट्रांसफ़र पर। अगर ट्रांसफ़र कंपनी किसी पर्सनल या बिज़नेस चेक को भुनाकर उसी पैसे से ट्रांसफ़र करती है, तो उसे भी नक़द माना जाएगा।
- टैक्स नहीं लगेगा: किसी वित्तीय संस्थान के खाते से निकाले गए पैसे पर, और डेबिट या क्रेडिट कार्ड से किए गए ट्रांसफ़र पर। प्रस्ताव ACH ट्रांसफ़र, कंपनी को दिए गए पर्सनल चेक, आम इस्तेमाल वाले प्रीपेड कार्ड और अमेरिका से बाहर जारी कार्ड को भी टैक्स से बाहर रखता है।
- टैक्स से बचने पर रोक: नक़द से प्रीपेड कार्ड ख़रीदकर तुरंत उससे ट्रांसफ़र करने को नक़द रेमिटेंस माना जा सकता है।
- छोटे ट्रांसफ़र: 15 डॉलर या उससे कम के ट्रांसफ़र बाहर हैं।
- किस रक़म पर टैक्स: पाने वाले को वास्तव में भेजी गई रक़म पर। कंपनी की फ़ीस और ख़ुद टैक्स इसमें नहीं जुड़ते।
- कौन चुकाएगा: टैक्स की देनदारी भेजने वाले की है। रेमिटेंस ट्रांसफ़र कंपनी इसे वसूलती है, महीने में दो बार जमा करती है और हर तिमाही फ़ॉर्म 720 पर रिपोर्ट करती है। कंपनी टैक्स वसूलने से चूके, तो देनदारी उसकी हो जाती है।
ये नियम अभी प्रस्ताव ही हैं। प्रस्ताव के मुताबिक़ ये अंतिम नियम छपने के बाद की तिमाहियों के ट्रांसफ़र पर लागू होंगे, लेकिन कंपनियां 31 दिसंबर 2025 के बाद के ट्रांसफ़र के लिए इन पर भरोसा कर सकती हैं, बशर्ते वे इनका पूरा पालन करें। नोटिस 2026-52 में IRS ने कंपनियों की ओर से टैक्स जमा करने में होने वाली चूक पर जुर्माने से राहत अंतिम नियम लागू होने तक बढ़ा दी है।
किन पर असर
- अमेरिका में पैसा भेजने वाले वे लोग, जो भारत में परिवार को पैसा भेजने के लिए नक़द लेकर मनी ट्रांसफ़र एजेंट के पास जाते हैं या मनी ऑर्डर अथवा कैशियर्स चेक से भुगतान करते हैं।
- जो लोग अमेरिकी बैंक खाते या कार्ड से ट्रांसफ़र नहीं करते, क्योंकि टैक्स सिर्फ़ नक़द और काग़ज़ी साधनों पर है।
- भारत में पैसा पाने वाले, जिनके लिए भारतीय टैक्स नियमों में कुछ नहीं बदला। यह अमेरिकी टैक्स है, जो भेजने वाले छोर पर वसूला जाता है।
प्रस्तावित नियम भेजने वाले की परिभाषा ऐसे व्यक्ति के रूप में करते हैं जो अमेरिका के किसी राज्य, टेरिटरी या डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कोलंबिया में है और मुख्य रूप से निजी, पारिवारिक या घरेलू ज़रूरत के लिए पैसा भेज रहा है। इसमें नागरिकता की कोई शर्त नहीं है।
आपके लिए इसका मतलब
- जहां तक हो सके, पैसा अपने अमेरिकी बैंक खाते से या अमेरिकी डेबिट कार्ड से भेजें। ये रास्ते 1% टैक्स से बाहर हैं।
- अगर नक़द देना ही पड़े, तो रसीद देखें। कंपनी को टैक्स अलग से दिखाना चाहिए।
- ट्रांसफ़र से ठीक पहले नक़द को प्रीपेड कार्ड में बदलकर टैक्स से बचने की कोशिश न करें। प्रस्तावित नियम इसे नक़द ट्रांसफ़र मान सकते हैं।
- 1% टैक्स के साथ कंपनी की फ़ीस और एक्सचेंज रेट का मार्जिन भी मिलाकर देखें, क्योंकि इन सबसे तय होता है कि परिवार को असल में कितना पैसा मिलेगा।
- अंतिम नियमों पर नज़र रखें; उनमें ब्योरे बदल सकते हैं।
अहम तारीखें
- 1 जनवरी 2026: 31 दिसंबर 2025 के बाद के ट्रांसफ़र पर टैक्स लागू।
- 10 अप्रैल 2026: IRS ने प्रस्तावित नियमों की घोषणा की।
- 13 अप्रैल 2026: प्रस्तावित नियम फ़ेडरल रजिस्टर में प्रकाशित।
- 12 जून 2026: टिप्पणियों की अवधि ख़त्म।
स्रोत
- US Treasury and IRS, proposed regulations REG-114499-25, Excise Tax on Remittance Transfers, Federal Register, 13 April 2026federalregister.gov · आधिकारिक स्रोत
- IR-2026-48: Treasury, IRS issue proposed regulations on the new remittance transfer tax (IRS)irs.gov
- Notice 2026-52: Extension of relief from penalty for failure to deposit remittance excise tax (IRS)irs.gov
- Proposed regulations: excise tax on remittance transfers (KPMG)kpmg.com
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या टैक्स सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं: आधिकारिक स्रोत देखें और अपने मामले में किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें। कोई गलती दिखी? लिखें [email protected] · सुधार नीति