विदेशी संपत्ति रिटर्न में नहीं दिखाई? लौटे NRI के पास FAST-DS के तहत 31 दिसंबर तक मौक़ा, कई मामलों में ₹1 लाख फ़ीस
एकबारगी स्कीम में वे लोग चूक सुधार सकते हैं जिन्होंने विदेशी बैंक खाते, ESOP, पॉलिसी या प्रॉपर्टी भारतीय रिटर्न में नहीं दिखाई। NRI रहते विदेश में कमाई से ख़रीदी संपत्ति पर सिर्फ़ ₹1 लाख की तय फ़ीस लगेगी।

मुख्य बातें
टैक्स- लघु करदाताओं की विदेशी आस्तियों का प्रकटीकरण स्कीम (FAST-DS) 16 अगस्त से 31 दिसंबर 2026 तक खुली है और संपत्ति का मूल्य 31 मार्च 2026 के हिसाब से लगेगा।
- NRI रहते विदेश में हुई कमाई से या भारत में टैक्स चुकाई आय से ख़रीदी गई विदेशी संपत्ति अगर रिटर्न में नहीं दिखाई गई, तो ₹5 करोड़ तक की संपत्ति ₹1 लाख फ़ीस देकर नियमित हो सकती है।
- बाक़ी अघोषित विदेशी संपत्ति और आय कुल ₹1 करोड़ तक हो तो 30% टैक्स और उतनी ही रक़म का जुर्माना लगेगा, यानी कुल मिलाकर 60%।
- सही घोषणा और भुगतान के बाद घोषित संपत्ति या आय पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत आगे टैक्स, जुर्माने और मुक़दमे से छूट मिलती है।
बरसों विदेश में रहकर भारत लौटे बहुत-से लोगों का कोई विदेशी बैंक खाता, पेंशन या बीमा पॉलिसी, या पुरानी कंपनी से मिले शेयर वहीं रह जाते हैं, और वे इन्हें भारतीय इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाना भूल जाते हैं। एक एकबारगी स्कीम अब ऐसी चूक सुधारने का मौक़ा दे रही है, और ऐसे कई मामलों में ख़र्च सिर्फ़ ₹1 लाख की तय फ़ीस है। यह खिड़की 31 दिसंबर 2026 को बंद हो जाएगी।
क्या बदला
लघु करदाताओं की विदेशी आस्तियों का प्रकटीकरण स्कीम, 2026 (Foreign Assets of Small Taxpayers - Disclosure Scheme, यानी FAST-DS) वित्त अधिनियम, 2026 से लाई गई है। इसके नियम 14 अगस्त 2026 को सा.का.नि. 732(अ) के रूप में अधिसूचित हुए, 16 अगस्त से लागू हुए और घोषणा की आख़िरी तारीख़ 31 दिसंबर 2026 तय करते हैं। संपत्ति का मूल्य 31 मार्च 2026 की स्थिति से आंका जाएगा।
बजट के साथ जारी वित्त मंत्रालय के ज्ञापन में स्कीम का मक़सद बताया गया है। उसमें आम मामले गिनाए गए हैं: विदेशी कंपनी से मिले ESOP या RSU, पढ़ाई के लिए विदेश गए छात्रों के बंद पड़े या कम रक़म वाले विदेशी बैंक खाते, लौटने वाले अनिवासियों की बचत या बीमा पॉलिसियां, और विदेश में तैनाती पर गए लोगों की संपत्तियां। ज्ञापन के मुताबिक़ सूचना के स्वचालित आदान-प्रदान (AEOI) से मिले आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में PAN धारकों ने विदेशी वित्तीय संपत्तियों की जानकारी नहीं दी है।
स्कीम में दो रास्ते हैं:
- ₹1 लाख फ़ीस (₹5 करोड़ तक की संपत्ति): वह विदेशी संपत्ति जो NRI रहते विदेश में हुई कमाई से ख़रीदी गई, लेकिन रेज़िडेंट बनने के बाद रिटर्न के संबंधित शेड्यूल में नहीं दिखाई गई। भारत में टैक्स चुका दी गई आय से ख़रीदी गई और रिटर्न में न दिखाई गई संपत्ति भी इसी में आती है।
- टैक्स और जुर्माना (कुल ₹1 करोड़ तक): बाक़ी अघोषित विदेशी संपत्ति और अघोषित विदेशी आय के लिए। 31 मार्च 2026 को संपत्ति के मूल्य का 30%, आय का 30% और फिर इस टैक्स के बराबर अतिरिक्त रक़म, यानी असल में 60%।
नियमों में उदाहरण भी दिए गए हैं। 2015 में NRI रहते विदेशी कमाई से ख़रीदा गया विदेश का एक प्लॉट, जिसकी क़ीमत ₹3 करोड़ है और जिसे मालिक ने रेज़िडेंट बनने के बाद कभी रिटर्न में नहीं दिखाया, सिर्फ़ ₹1 लाख फ़ीस में नियमित हो जाएगा। ₹60 लाख के अघोषित विदेशी खाते और ₹20 लाख की बिना टैक्स वाली विदेशी आय पर ₹48 लाख चुकाने होंगे। कुल ₹6.5 करोड़ के विदेशी म्यूचुअल फ़ंड और शेयर ₹5 करोड़ की सीमा से ऊपर हैं, इसलिए उन पर यह स्कीम लागू नहीं होगी।
किन पर असर
स्कीम रेज़िडेंट लोगों के लिए है, और उनके लिए भी जो अभी NRI या RNOR हैं, बशर्ते आय जिस साल हुई या संपत्ति जिस साल ख़रीदी गई, उस साल वे रेज़िडेंट थे। KPMG के मुताबिक़ ये नियम लौटे NRI, पूर्व रेज़िडेंट और अलग-अलग देशों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अहम हो सकते हैं।
ऐसी आय या संपत्ति पर स्कीम लागू नहीं होगी जो अपराध से कमाई हो और जिस पर मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही शुरू हो चुकी या लंबित हो, और न उन वर्षों पर जिनका ब्लैक मनी एक्ट के तहत असेसमेंट पूरा हो चुका है। चुकाई गई रक़म वापस नहीं होगी।
आपके लिए इसका मतलब
- विदेश में जो कुछ है, उसकी सूची बनाएं। रेज़िडेंट रहते भरे हर रिटर्न में देखें कि विदेशी खाते, शेयर, ESOP या RSU, पॉलिसी, पेंशन और प्रॉपर्टी विदेशी संपत्ति वाले शेड्यूल में दिखाए गए थे या नहीं।
- तय करें कि कौन-सा रास्ता लागू होगा। पैसा NRI रहते हुई कमाई का है या भारत में टैक्स चुकाई आय का, तो ₹1 लाख वाला रास्ता लागू हो सकता है। वरना 60% वाला रास्ता है, और वह भी कुल ₹1 करोड़ तक।
- मूल्य सही आंकें। आम तौर पर लागत और 31 मार्च 2026 के बाज़ार मूल्य में से जो ज़्यादा हो, वही मूल्य माना जाएगा, जिसे RBI की रेफ़रेंस रेट से रुपये में बदलना होगा। विदेशी बैंक खाते का मूल्य उसका बैलेंस नहीं, बल्कि खाता खुलने से अब तक जमा की गई कुल रक़म है।
- 31 दिसंबर तक ऑनलाइन फ़ॉर्म 1 भरें। विभाग फ़ॉर्म 2 में आदेश भेजेगा। उस आदेश वाले महीने के अंत से दो महीने के भीतर भुगतान करें, या अगले दो महीनों में 1% मासिक साधारण ब्याज के साथ, और फ़ॉर्म 3 में इसकी सूचना दें। यह मियाद चूकी तो स्कीम का फ़ायदा नहीं मिलेगा।
- विशेषज्ञ की सलाह लें। मूल्यांकन और रास्ते का चुनाव ही कुल ख़र्च तय करता है, इसलिए फ़ाइल करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट से बात करें।
सही घोषणा और भुगतान के बाद घोषित संपत्ति या आय पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत आगे टैक्स, जुर्माने और मुक़दमे से छूट मिलती है, 2025-26 तक के वर्षों के लिए।
अहम तारीखें
- 31 मार्च 2026: घोषित सभी संपत्तियों के मूल्यांकन की तारीख़।
- 16 अगस्त 2026: स्कीम शुरू हुई।
- 31 दिसंबर 2026: फ़ॉर्म 1 में घोषणा की आख़िरी तारीख़।
- आदेश वाले महीने के बाद दो महीने (ब्याज के साथ दो महीने और): फ़ॉर्म 2 के आदेश की रक़म चुकाने की मियाद।
स्रोत
- CBDT, Foreign Assets of Small Taxpayers - Disclosure Scheme Rules, 2026, G.S.R. 732(E), Notification No. 114/2026, 14 August 2026incometax.gov.in · आधिकारिक स्रोत
- वित्त विधेयक, 2026 के प्रावधानों पर ज्ञापन: FAST-DS 2026 (वित्त मंत्रालय)indiabudget.gov.in
- वित्त विधेयक, 2026, अध्याय IV: Foreign Assets of Small Taxpayers Disclosure Scheme (वित्त मंत्रालय)indiabudget.gov.in
- लेटेस्ट न्यूज़: FAST-DS नियमों और फ़ॉर्म पर अधिसूचना संख्या 114/2026 (आयकर ई-फ़ाइलिंग पोर्टल)incometax.gov.in
- India: Government notifies the Foreign Assets of Small Taxpayers - Disclosure Scheme Rules, 2026, GMS Flash Alert 2026-224 (KPMG)kpmg.com
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या टैक्स सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं: आधिकारिक स्रोत देखें और अपने मामले में किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें। कोई गलती दिखी? लिखें [email protected] · सुधार नीति