पुराना क़ानून या नया? ICAI की हैंडबुक बताती है 2025-26 और 2026-27 में NRI का टैक्स रेज़िडेंस किस अधिनियम से तय होगा
ICAI की जुलाई 2026 की हैंडबुक के मुताबिक़ आयकर अधिनियम, 2025 में दिनों की गिनती वाली शर्तें वही हैं, बस धाराओं के नंबर बदले हैं। नई भाषा पर विवाद की आशंका जताई गई है और टैक्स रेज़िडेंस को FEMA से अलग समझाया गया है।

मुख्य बातें
टैक्स- इंस्टीट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया (ICAI) की जुलाई 2026 की हैंडबुक के मुताबिक़ आयकर अधिनियम, 2025 टैक्स वर्ष 2026-27 से लागू है, और धारा 536 पिछले वर्षों के लिए 1961 के अधिनियम को प्रभावी रखती है।
- व्यक्तियों के लिए दिनों की गिनती वाली शर्तें सार रूप में वही हैं, बस नंबर बदले हैं: रेज़िडेंट का दर्जा अब धारा 6(2) में और स्टेटलेस डीम्ड-रेज़िडेंट नियम धारा 6(7) में।
- हैंडबुक नई भाषा पर संभावित विवाद की ओर इशारा करती है और याद दिलाती है कि FEMA में रेज़िडेंस इरादे से तय होता है, सिर्फ़ भारत में बिताए दिनों से नहीं।
भारत के नए आयकर क़ानून ने वे धाराएं बदल दी हैं, जिनके आधार पर NRI तय करते हैं कि वे रेज़िडेंट हैं या नहीं, लेकिन व्यक्तियों के मामले में शर्तें ख़ुद नहीं बदलीं। इंस्टीट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया (ICAI) की एक संदर्भ हैंडबुक का यही मुख्य निष्कर्ष है। हैंडबुक पेशेवरों के लिए लिखी गई है, लेकिन जो बातें यह साफ़ करती है और जो सवाल खुले छोड़ती है, वे भारत में रिटर्न भरने वाले हर NRI के काम की हैं।
क्या बदला
Handbook on Residential Status for NRIs: Tax and FEMA Aspects जुलाई 2026 में ICAI की इंटरनेशनल टैक्सेशन कमेटी ने जारी की है। इसके 11 अध्यायों में व्यक्तियों का रेज़िडेंस, 1961 और 2025 के अधिनियमों की तुलना, कर संधियां, अदालती फ़ैसले, दूसरे देशों के रेज़िडेंसी क़ानून और विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (FEMA) शामिल हैं।
किस साल पर कौन-सा अधिनियम। आयकर अधिनियम, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ। हैंडबुक टैक्स वर्ष 2026-27 को नए क़ानून का पहला वर्ष मानती है और बताती है कि उसी तारीख़ से 1961 का अधिनियम निरस्त हो गया। 2025 के अधिनियम की धारा 536, यानी 22 उप-खंडों वाला सेविंग्स क्लॉज़, पिछली अवधियों के लिए पुराने क़ानून को प्रभावी रखता है। व्यवहार में इसका मतलब:
- FY 2025-26 (31 मार्च 2026 को ख़त्म हुआ साल) के लिए रेज़िडेंस 1961 के अधिनियम की धारा 6 से तय होगा।
- टैक्स वर्ष 2026-27 (1 अप्रैल 2026 से) से 2025 के अधिनियम की धारा 6 लागू होगी।
हैंडबुक आगाह करती है कि पेशेवरों को कुछ समय तक दोनों क़ानूनों को साथ-साथ लेकर चलना होगा।
शर्तें वही, नंबर नए। हैंडबुक के मुताबिक़ 2025 के अधिनियम ने व्यक्तियों की रेज़िडेंसी की शर्तों में कोई ठोस बदलाव नहीं किया है:
- 182 दिन की शर्त धारा 6(1)(a) से धारा 6(2)(a) में चली गई है।
- 60 दिन और 365 दिन वाली शर्त धारा 6(2)(b) में है।
- नौकरी के लिए भारत छोड़ने वाले नागरिकों या भारतीय जहाज़ के क्रू सदस्यों वाली छूट धारा 6(3) में है।
- भारत आने वाले नागरिक और भारतीय मूल के व्यक्ति धारा 6(4) में आते हैं, और भारतीय आय ₹15 लाख से ज़्यादा होने पर धारा 6(5) के तहत 60 दिन की सीमा 120 दिन हो जाती है।
- नॉट-ऑर्डिनरिली-रेज़िडेंट (NOR) का दर्जा अब धारा 6(13) में है।
स्टेटलेस नियम। धारा 6(7) के तहत किसी भारतीय नागरिक को रेज़िडेंट माना जाता है अगर वह किसी दूसरे देश में टैक्स के दायरे में नहीं है और विदेशी स्रोतों के अलावा उसकी आय ₹15 लाख से ज़्यादा है। इसमें भारत में बिताए दिनों की कोई भूमिका नहीं है। धारा 6(13)(c) के तहत ऐसे व्यक्ति को नॉट-ऑर्डिनरिली-रेज़िडेंट माना जाता है।
खुले सवाल। हैंडबुक कुछ ऐसे शब्दों की ओर ध्यान दिलाती है जिन पर विवाद हो सकता है। धारा 6(2)(b) में अब “cumulatively” (संचयी रूप से) शब्द है, जिसकी इस संदर्भ में अभी कोई व्याख्या नहीं हुई है। 2025 के अधिनियम में वह पुराना क्रॉस-रेफ़रेंस भी नहीं है जो “भारतीय मूल के व्यक्ति” की परिभाषा देता था। डीम्ड-रेज़िडेंसी वाले प्रावधान की भाषा भी बदली गई है; हैंडबुक के मुताबिक़ नतीजा वही है, लेकिन नई भाषा से नई मुक़दमेबाज़ी हो सकती है।
FEMA की कसौटी अलग। हैंडबुक ज़ोर देकर कहती है कि टैक्स रेज़िडेंस मुख्य रूप से भारत में शारीरिक मौजूदगी से तय होता है, जबकि FEMA में रेज़िडेंस ठहरने के इरादे और मक़सद से। एक ही व्यक्ति एक ही साल में एक क़ानून के तहत रेज़िडेंट और दूसरे के तहत नॉन-रेज़िडेंट हो सकता है।
किन पर असर
- वे NRI जो 182 दिन या 120 दिन की सीमा के क़रीब हैं।
- 2025-26 या 2026-27 में भारत लौटे या भारत छोड़कर गए लोग।
- ऐसे देशों में रह रहे भारतीय नागरिक जहां उनकी आय पर टैक्स नहीं लगता।
- वे सभी जिनके बैंक खाते का प्रकार FEMA स्टेटस पर निर्भर है।
आपके लिए इसका मतलब
- FY 2025-26 के रिटर्न के लिए अपना स्टेटस 1961 के अधिनियम से जांचें। टैक्स वर्ष 2026-27 के लिए 2025 के अधिनियम की धारा 6 देखें।
- हर साल भारत में बिताए दिन पासपोर्ट की मुहरों या यात्रा रिकॉर्ड से गिनें और सबूत संभालकर रखें।
- अगर आप ऐसे देश में रहते हैं जहां आपकी आय पर टैक्स नहीं लगता और आपकी भारतीय आय ₹15 लाख से ज़्यादा है, तो अपने सलाहकार से धारा 6(7) पर बात करें।
- FEMA स्टेटस अलग से तय करें, क्योंकि उसी से तय होता है कि आपके खाते NRE/NRO होने चाहिए या रेज़िडेंट खाते।
- अगर आपकी स्थिति “cumulatively” जैसी नई भाषा पर टिकी है, तो यह मानकर न चलें कि पुरानी व्याख्या ही लागू होगी; पेशेवर सलाह लें।
अहम तारीखें
- 31 मार्च 2026: FY 2025-26 ख़त्म, यानी 1961 के अधिनियम के रेज़िडेंसी नियमों वाला आख़िरी साल।
- 1 अप्रैल 2026: आयकर अधिनियम, 2025 लागू; टैक्स वर्ष 2026-27 शुरू।
- जुलाई 2026: ICAI की हैंडबुक जारी।
स्रोत
- ICAI International Taxation Committee, Handbook on Residential Status for NRIs: Tax and FEMA Aspects (जुलाई 2026)publication.icai.org · आधिकारिक स्रोत
- Committee on International Taxation publications (ICAI)icai.org
- प्रेस विज्ञप्ति: आयकर अधिनियम, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू (आयकर विभाग)incometaxindia.gov.in
- ICAI handbook on the stateless NRI rule under the new Income-tax Act (Juris Hour)jurishour.in
- ICAI releases handbook on residential status for NRIs (StudyCafe)studycafe.in
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या टैक्स सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं: आधिकारिक स्रोत देखें और अपने मामले में किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें। कोई गलती दिखी? लिखें [email protected] · सुधार नीति